महाभारत 4.56.19
दुःशासनो विकर्णश्च दुःसहोऽथ विविंशतिःआगत्य भीमधन्वानं बीभत्सुं पर्यवारयन्
duḥśāsano vikarṇaśca duḥsaho'tha viviṃśatiḥāgatya bhīmadhanvānaṃ bībhatsuṃ paryavārayan
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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