महाभारत 5.106.11
अत्र दत्तानि सूर्येण यजूंषि द्विजसत्तमअत्र लब्धवरैः सोमः सुरैः क्रतुषु पीयते
atra dattāni sūryeṇa yajūṃṣi dvijasattamaatra labdhavaraiḥ somaḥ suraiḥ kratuṣu pīyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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