महाभारत 5.11.17
सर्वलक्षणसंपन्नां ब्रह्मंस्त्वं मां प्रभाषसेदेवराजस्य दयितामत्यन्तसुखभागिनीम्
sarvalakṣaṇasaṃpannāṃ brahmaṃstvaṃ māṃ prabhāṣasedevarājasya dayitāmatyantasukhabhāginīm
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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