महाभारत 5.113.11
तस्माच्चतुर्णां वंशानां स्थापयित्री सुता ममइयं सुरसुतप्रख्या सर्वधर्मोपचायिनी
tasmāccaturṇāṃ vaṃśānāṃ sthāpayitrī sutā mamaiyaṃ surasutaprakhyā sarvadharmopacāyinī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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