महाभारत 5.113.14
स भवान्प्रतिगृह्णातु ममेमां माधवीं सुताम्अहं दौहित्रवान्स्यां वै वर एष मम प्रभो
sa bhavānpratigṛhṇātu mamemāṃ mādhavīṃ sutāmahaṃ dauhitravānsyāṃ vai vara eṣa mama prabho
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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