महाभारत 5.113.16
उपलब्धमिदं द्वारमश्वानामिति चाण्डजःउक्त्वा गालवमापृच्छ्य जगाम भवनं स्वकम्
upalabdhamidaṃ dvāramaśvānāmiti cāṇḍajaḥuktvā gālavamāpṛcchya jagāma bhavanaṃ svakam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें