महाभारत 5.113.18
सोऽगच्छन्मनसेक्ष्वाकुं हर्यश्वं राजसत्तमम्अयोध्यायां महावीर्यं चतुरङ्गबलान्वितम्
so'gacchanmanasekṣvākuṃ haryaśvaṃ rājasattamamayodhyāyāṃ mahāvīryaṃ caturaṅgabalānvitam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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