महाभारत 5.113.20
तमुपागम्य विप्रः स हर्यश्वं गालवोऽब्रवीत्कन्येयं मम राजेन्द्र प्रसवैः कुलवर्धिनी
tamupāgamya vipraḥ sa haryaśvaṃ gālavo'bravītkanyeyaṃ mama rājendra prasavaiḥ kulavardhinī
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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