महाभारत 5.113.6
वक्तुमिच्छामि तु सखे यथा जानासि मां पुरान तथा वित्तवानस्मि क्षीणं वित्तं हि मे सखे
vaktumicchāmi tu sakhe yathā jānāsi māṃ purāna tathā vittavānasmi kṣīṇaṃ vittaṃ hi me sakhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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