महाभारत 5.113.8
तत्तु दास्यामि यत्कार्यमिदं संपादयिष्यतिअभिगम्य हताशो हि निवृत्तो दहते कुलम्
tattu dāsyāmi yatkāryamidaṃ saṃpādayiṣyatiabhigamya hatāśo hi nivṛtto dahate kulam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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