महाभारत 5.115.2
तत्र गच्छावहे भद्रे शनैरागच्छ मा शुचःधार्मिकः संयमे युक्तः सत्यश्चैव जनेश्वरः
tatra gacchāvahe bhadre śanairāgaccha mā śucaḥdhārmikaḥ saṃyame yuktaḥ satyaścaiva janeśvaraḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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