महाभारत 5.116.12
अहमप्येकमेवास्यां जनयिष्यामि गालवपुत्रं द्विज गतं मार्गं गमिष्यामि परैरहम्
ahamapyekamevāsyāṃ janayiṣyāmi gālavaputraṃ dvija gataṃ mārgaṃ gamiṣyāmi parairaham
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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