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महाभारत 5.134.2
दीर्णं हि दृष्ट्वा राजानं सर्वमेवानुदीर्यतेराष्ट्रं बलममात्याश्च पृथक्कुर्वन्ति ते मतिम्
dīrṇaṃ hi dṛṣṭvā rājānaṃ sarvamevānudīryaterāṣṭraṃ balamamātyāśca pṛthakkurvanti te matim
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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