महाभारत 5.158.10
अशक्तेन च यच्छप्तं भीमसेनेन पाण्डवदुःशासनस्य रुधिरं पीयतां यदि शक्यते
aśaktena ca yacchaptaṃ bhīmasenena pāṇḍavaduḥśāsanasya rudhiraṃ pīyatāṃ yadi śakyate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें