महाभारत 5.158.2
अभिज्ञो दूतवाक्यानां यथोक्तं ब्रुवतो ममदुर्योधनसमादेशं श्रुत्वा न क्रोद्धुमर्हसि
abhijño dūtavākyānāṃ yathoktaṃ bruvato mamaduryodhanasamādeśaṃ śrutvā na kroddhumarhasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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