महाभारत 5.159.7
मद्वचश्चापि भूयस्ते वक्तव्यः स सुयोधनःश्व इदानीं प्रदृश्येथाः पुरुषो भव दुर्मते
madvacaścāpi bhūyaste vaktavyaḥ sa suyodhanaḥśva idānīṃ pradṛśyethāḥ puruṣo bhava durmate
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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