महाभारत 5.167.3
लघ्वस्त्रश्चित्रयोधी च मनस्वी दृढविक्रमःसंस्मरन्वै परिक्लेशं स्वपितुर्विक्रमिष्यति
laghvastraścitrayodhī ca manasvī dṛḍhavikramaḥsaṃsmaranvai parikleśaṃ svapiturvikramiṣyati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें