महाभारत 5.167.7
पाण्डवैः सह राजेन्द्र तव सेनासु भारतअग्निमारुतवद्राजन्नाह्वयन्तः परस्परम्
pāṇḍavaiḥ saha rājendra tava senāsu bhārataagnimārutavadrājannāhvayantaḥ parasparam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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