महाभारत 5.172.12
न स भीष्मो महाबाहुर्मामिच्छति विशां पतेभ्रातृहेतोः समारम्भो भीष्मस्येति श्रुतं मया
na sa bhīṣmo mahābāhurmāmicchati viśāṃ patebhrātṛhetoḥ samārambho bhīṣmasyeti śrutaṃ mayā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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