महाभारत 5.172.17
तामेवं भाषमाणां तु शाल्वः काशिपतेः सुताम्अत्यजद्भरतश्रेष्ठ त्वचं जीर्णामिवोरगः
tāmevaṃ bhāṣamāṇāṃ tu śālvaḥ kāśipateḥ sutāmatyajadbharataśreṣṭha tvacaṃ jīrṇāmivoragaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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