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महाभारत 5.32.12
परप्रयुक्तः पुरुषो विचेष्टते; सूत्रप्रोता दारुमयीव योषाइमं दृष्ट्वा नियमं पाण्डवस्य; मन्ये परं कर्म दैवं मनुष्यात्
paraprayuktaḥ puruṣo viceṣṭate; sūtraprotā dārumayīva yoṣāimaṃ dṛṣṭvā niyamaṃ pāṇḍavasya; manye paraṃ karma daivaṃ manuṣyāt
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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