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महाभारत 5.32.28
त्वमेवैको जातपुत्रेषु राज;न्वशं गन्ता सर्वलोके नरेन्द्रकामात्मनां श्लाघसे द्यूतकाले; नान्यच्छमात्पश्य विपाकमस्य
tvamevaiko jātaputreṣu rāja;nvaśaṃ gantā sarvaloke narendrakāmātmanāṃ ślāghase dyūtakāle; nānyacchamātpaśya vipākamasya
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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