महाभारत 5.63.4
भीमसेनं च कौन्तेयं यस्य नास्ति समो बलेरणान्तकं तर्कयसे महावातमिव द्रुमः
bhīmasenaṃ ca kaunteyaṃ yasya nāsti samo baleraṇāntakaṃ tarkayase mahāvātamiva drumaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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