महाभारत 5.83.14
आसनानि विचित्राणि युक्तानि विविधैर्गुणैःस्त्रियो गन्धानलंकारान्सूक्ष्माणि वसनानि च
āsanāni vicitrāṇi yuktāni vividhairguṇaiḥstriyo gandhānalaṃkārānsūkṣmāṇi vasanāni ca
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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