महाभारत 5.83.3
अद्भुतं महदाश्चर्यं श्रूयते कुरुनन्दनस्त्रियो बालाश्च वृद्धाश्च कथयन्ति गृहे गृहे
adbhutaṃ mahadāścaryaṃ śrūyate kurunandanastriyo bālāśca vṛddhāśca kathayanti gṛhe gṛhe
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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