महाभारत 5.99.3सुरूपपक्षिराजेन सुबलेन च मातलेवर्धितानि प्रसूत्या वै विनताकुलकर्तृभिःsurūpapakṣirājena subalena ca mātalevardhitāni prasūtyā vai vinatākulakartṛbhiḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें