महाभारत 6.10.16
वेदस्मृतिं वेतसिनीं त्रिदिवामिष्कुमालिनीम्करीषिणीं चित्रवहां चित्रसेनां च निम्नगाम्
vedasmṛtiṃ vetasinīṃ tridivāmiṣkumālinīmkarīṣiṇīṃ citravahāṃ citrasenāṃ ca nimnagām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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