महाभारत 6.10.22
पारिषेणामसिक्नीं च सरलां भारमर्दिनीम्पुरुहीं प्रवरां मेनां मोघां घृतवतीं तथा
pāriṣeṇāmasiknīṃ ca saralāṃ bhāramardinīmpuruhīṃ pravarāṃ menāṃ moghāṃ ghṛtavatīṃ tathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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