महाभारत 6.10.36
तथा नद्यस्त्वप्रकाशाः शतशोऽथ सहस्रशःइत्येताः सरितो राजन्समाख्याता यथास्मृति
tathā nadyastvaprakāśāḥ śataśo'tha sahasraśaḥityetāḥ sarito rājansamākhyātā yathāsmṛti
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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