महाभारत 6.10.59
समङ्गाः कोपनाश्चैव कुकुराङ्गदमारिषाःध्वजिन्युत्सवसंकेतास्त्रिगर्ताः सर्वसेनयः
samaṅgāḥ kopanāścaiva kukurāṅgadamāriṣāḥdhvajinyutsavasaṃketāstrigartāḥ sarvasenayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें