महाभारत 6.102.16हतवीरान्रथान्राजन्संयुक्ताञ्जवनैर्हयैःअपश्याम महाराज ह्रियमाणान्रणाजिरेhatavīrānrathānrājansaṃyuktāñjavanairhayaiḥapaśyāma mahārāja hriyamāṇānraṇājireइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें