महाभारत 6.102.60
एह्येहि पुण्डरीकाक्ष देवदेव नमोऽस्तु तेमामद्य सात्वतश्रेष्ठ पातयस्व महाहवे
ehyehi puṇḍarīkākṣa devadeva namo'stu temāmadya sātvataśreṣṭha pātayasva mahāhave
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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