महाभारत 6.11.5
चत्वारि च सहस्राणि वर्षाणां कुरुसत्तमआयुःसंख्या कृतयुगे संख्याता राजसत्तम
catvāri ca sahasrāṇi varṣāṇāṃ kurusattamaāyuḥsaṃkhyā kṛtayuge saṃkhyātā rājasattama
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें