महाभारत 6.13.10
द्युतिमान्नाम कौरव्य तृतीयः कुमुदो गिरिःचतुर्थः पुष्पवान्नाम पञ्चमस्तु कुशेशयः
dyutimānnāma kauravya tṛtīyaḥ kumudo giriḥcaturthaḥ puṣpavānnāma pañcamastu kuśeśayaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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