महाभारत 6.13.13
धृतिमत्पञ्चमं वर्षं षष्ठं वर्षं प्रभाकरम्सप्तमं कापिलं वर्षं सप्तैते वर्षपुञ्जकाः
dhṛtimatpañcamaṃ varṣaṃ ṣaṣṭhaṃ varṣaṃ prabhākaramsaptamaṃ kāpilaṃ varṣaṃ saptaite varṣapuñjakāḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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