महाभारत 6.13.18
अन्धकारात्परो राजन्मैनाकः पर्वतोत्तमःमैनाकात्परतो राजन्गोविन्दो गिरिरुत्तमः
andhakārātparo rājanmainākaḥ parvatottamaḥmainākātparato rājangovindo giriruttamaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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