महाभारत 6.13.1
संजय उवाच · saṃjaya uvāca
उत्तरेषु तु कौरव्य द्वीपेषु श्रूयते कथायथाश्रुतं महाराज ब्रुवतस्तन्निबोध मे
uttareṣu tu kauravya dvīpeṣu śrūyate kathāyathāśrutaṃ mahārāja bruvatastannibodha me
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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