महाभारत 6.13.20
देशांस्तत्र प्रवक्ष्यामि तन्मे निगदतः शृणुक्रौञ्चस्य कुशलो देशो वामनस्य मनोनुगः
deśāṃstatra pravakṣyāmi tanme nigadataḥ śṛṇukrauñcasya kuśalo deśo vāmanasya manonugaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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