महाभारत 6.13.21
मनोनुगात्परश्चोष्णो देशः कुरुकुलोद्वहउष्णात्परः प्रावरकः प्रावरादन्धकारकः
manonugātparaścoṣṇo deśaḥ kurukulodvahauṣṇātparaḥ prāvarakaḥ prāvarādandhakārakaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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