महाभारत 6.13.23सिद्धचारणसंकीर्णो गौरप्रायो जनाधिपएते देशा महाराज देवगन्धर्वसेविताःsiddhacāraṇasaṃkīrṇo gauraprāyo janādhipaete deśā mahārāja devagandharvasevitāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें