महाभारत 6.13.24
पुष्करे पुष्करो नाम पर्वतो मणिरत्नमान्तत्र नित्यं निवसति स्वयं देवः प्रजापतिः
puṣkare puṣkaro nāma parvato maṇiratnamāntatra nityaṃ nivasati svayaṃ devaḥ prajāpatiḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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