महाभारत 6.13.34
तस्याहं परिमाणं तु न संख्यातुमिहोत्सहेअसंख्यातः स नित्यं हि तिर्यगूर्ध्वमधस्तथा
tasyāhaṃ parimāṇaṃ tu na saṃkhyātumihotsaheasaṃkhyātaḥ sa nityaṃ hi tiryagūrdhvamadhastathā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें