महाभारत 6.13.36
पुष्करैः पद्मसंकाशैर्वर्ष्मवद्भिर्महाप्रभैःते शनैः पुनरेवाशु वायून्मुञ्चन्ति नित्यशः
puṣkaraiḥ padmasaṃkāśairvarṣmavadbhirmahāprabhaiḥte śanaiḥ punarevāśu vāyūnmuñcanti nityaśaḥ
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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