महाभारत 6.13.47
यथादृष्टं मया प्रोक्तं सनिर्याणमिदं जगत्तस्मादाश्वस कौरव्य पुत्रं दुर्योधनं प्रति
yathādṛṣṭaṃ mayā proktaṃ saniryāṇamidaṃ jagattasmādāśvasa kauravya putraṃ duryodhanaṃ prati
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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