महाभारत 6.13.50
इदं तु भारतं वर्षं यत्र वर्तामहे वयम्पूर्वं प्रवर्तते पुण्यं तत्सर्वं श्रुतवानसि
idaṃ tu bhārataṃ varṣaṃ yatra vartāmahe vayampūrvaṃ pravartate puṇyaṃ tatsarvaṃ śrutavānasi
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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