महाभारत 6.14.3संजयोऽहं महाराज नमस्ते भरतर्षभहतो भीष्मः शांतनवो भरतानां पितामहःsaṃjayo'haṃ mahārāja namaste bharatarṣabhahato bhīṣmaḥ śāṃtanavo bharatānāṃ pitāmahaḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें