महाभारत 6.14.7
जामदग्न्यं रणे राममायोध्य वसुसंभवःन हतो जामदग्न्येन स हतोऽद्य शिखण्डिना
jāmadagnyaṃ raṇe rāmamāyodhya vasusaṃbhavaḥna hato jāmadagnyena sa hato'dya śikhaṇḍinā
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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