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महाभारत 6.2.18
अत्युग्रं च प्रपश्यन्ति युद्धमानन्दिनो द्विजाःक्रव्यादा भक्षयिष्यन्ति मांसानि गजवाजिनाम्
atyugraṃ ca prapaśyanti yuddhamānandino dvijāḥkravyādā bhakṣayiṣyanti māṃsāni gajavājinām
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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