महाभारत 6.2.32
रोहिणीं पीडयन्नेष स्थितो राजञ्शनैश्चरःव्यावृत्तं लक्ष्म सोमस्य भविष्यति महद्भयम्
rohiṇīṃ pīḍayanneṣa sthito rājañśanaiścaraḥvyāvṛttaṃ lakṣma somasya bhaviṣyati mahadbhayam
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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