महाभारत 6.2.5तेषु कालपरीतेषु विनश्यत्सु च भारतकालपर्यायमाज्ञाय मा स्म शोके मनः कृथाःteṣu kālaparīteṣu vinaśyatsu ca bhāratakālaparyāyamājñāya mā sma śoke manaḥ kṛthāḥइस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।पुस्तक में खोलेंयह श्लोक साझा करें